Friday, March 30, 2012

प्रभु श्री राम जी के "जन्मदिवस "

Luckn" जय श्री राम "  
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हिन्दू मान्यतानुसार चैत्र मास की " नवमी तिथि " को प्रभु श्री राम जी के "जन्मदिवस " के नाम से प्रसिद्ध है.ऐसा कहते है कि दोपहर १२ बजे प्रभु राम ने त्रेता युग में अयोध्या नरेश दशरथ जी के घर में जन्म लिया था . तभी से यह प्रथा चली आ रही है कि इस तिथि पर सभी राम भक्त  "प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव " मानतें हैं .
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वैसे " राम " तो कण-कण वासी हैं ;" जो सर्वत्र रमा है ; वही राम है ". राम ही परब्रह्म -परमेश्वर हैं ; वही जड़-चेतन के स्वामी हैं . वही निराकार है तो .. वही साकार है.

" यदा - यदा ..हि धर्मस्य .. " अर्थात जब धरती पर धर्म की हानि होने लगती है अथवा असुरी शक्तियों से धरती काँप उठती है यानि सत्कर्मियों का ; धार्मिक लोगो जीवन दुष्कर हो जाता है ; तो प्रभु कोई न कोई रूप अथवा अवतार लेकर अवतरित होतें है और सच्चे लोगों की जो धर्म के अनुयायी होतें है उनकी रक्षा करते हैं .
ऐसा भी माना जाता है कि- अपने पूर्व जन्म में राजा दशरथ और कौशल्या ने कठोर तप द्वारा प्रभु को प्रसन्न कर ; उनको अपने पुत्र रत्न के रूप में प्राप्त करने की इच्छा की थी . भक्तवत्सल प्रभु प्रसन्न हो - उनको वरदान दिया था कि - उनके ( अगले जन्म में ) - वह स्वयं उनके "पुत्र " के रूप में जन्म लेंगें . अतः त्रेता युग में राजा दशरथ और कौशल्या के घर प्रभु श्री राम ने जन्म लिया था . एक तो भक्तों को दिया वचन पूरा किया .दूसरा- उस समय भी रावन सहित अनेक राक्षसों ने राजाओं एवं तपस्वी- ऋषियों- मुनियों का जीना कठिन कर रक्खा था - वे कोई भी यज्ञ - अनुष्ठान करने में सफल नहीं हो पा रहे थे ; चारों ओर मानो हाहाकार सा मचा था .अतः भगवान् ने राजा दशरथ जी के यहाँ साकार " मानव रूप " में जन्म लिया था . और न केवल अपनी बाल-लीला द्वारा अपने माता - पिता को संतान सुख दिया बल्कि ज्यों-ज्यों बड़े होते गए वैसे -वैसे ऋषियों मुनियों सहित सभी के दुःख दूर किये . राक्षसों का संहार किया , रावन पर विजय हासिल की और एक संयमित एवं मर्यादित राम - राज्य किया एक महानतम उदहारण प्रस्तुत किया. जिसका इतने युग बीत जाने के बाद ... आज भी प्रभाव दिखाई देता है . प्रभु की महिमा अपरम्पार है. उनकी महिमा का गुणगान जितना करो उतना कम है ; अनंता " हरी अनंत हरी कथा " उनका जितना नाम लें उतना अधिक शुभ फल मिलता है .
सबसे बड़ी बात तो ये कि - " राम का नाम सदा सुखदाई " .

" श्री राम जन्म पर " मैंने प्रभु की महिमा का गुणगान कुछ यूं किया है -
जय श्री राम ने सबको पार लगाया ,
सबको पर लगाया बेडा पार कराया .-२

जंगल जाके ऋषियों को मुनियों को पार लगाया
  विश्वामित्र  के यज्ञ की दानव से रक्षा किया ; जय श्री राम ने .....
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वन में जा के अहिल्या को पाप से मुक्त कराया
जूठे बेर खा के शबरी का मान बढाया ; जय श्री राम ने.....
जनक जी के प्रण को श्रीराम ने पूरा कराया
पशुराम के कोप / भ्रम को पल में दूर भगाया ; जय श्री राम ने .....
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शरणागत विभीषण को लंकाधिपति बनाया
हनुमान की भक्ति को जग में खास बनाया ; जय श्री राम ने ....
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सभी चित्रों के लिए गूगल का साभार .

प्रभु के इस गुणगान एवं मंगलकामनों सहित --
मीनाक्षी श्रीवास्तवow Bloggers' Association लख़नऊ ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर चित्रण....

    बधाई.

    अनु

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